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Q: `सतां सद्भि: सङ्ग: कथमपि हि पुण्येन भवति' यह सूक्ति किस नाट्यग्रन्थ से सम्बद्ध है?
  • A. अभिज्ञाशाकुन्तलम्
  • B. उत्तरामचरितम्
  • C. मृच्छकटिकम्
  • D. विक्रमोर्वशीयम्
Correct Answer: Option B - ``सतां सद्भि: सङ्ग: कथमपि हि पुष्येन भवति'' यह सूक्ति उत्तरामचरितम् नाटक के द्वितीय अङ्क से उद्धृत है। इसका तात्पर्य है, ``सज्जनों का सज्जनों से मिलन बड़े पुण्य से होता है।''
B. ``सतां सद्भि: सङ्ग: कथमपि हि पुष्येन भवति'' यह सूक्ति उत्तरामचरितम् नाटक के द्वितीय अङ्क से उद्धृत है। इसका तात्पर्य है, ``सज्जनों का सज्जनों से मिलन बड़े पुण्य से होता है।''

Explanations:

``सतां सद्भि: सङ्ग: कथमपि हि पुष्येन भवति'' यह सूक्ति उत्तरामचरितम् नाटक के द्वितीय अङ्क से उद्धृत है। इसका तात्पर्य है, ``सज्जनों का सज्जनों से मिलन बड़े पुण्य से होता है।''