Correct Answer:
Option B - ``सतां सद्भि: सङ्ग: कथमपि हि पुष्येन भवति'' यह सूक्ति उत्तरामचरितम् नाटक के द्वितीय अङ्क से उद्धृत है। इसका तात्पर्य है, ``सज्जनों का सज्जनों से मिलन बड़े पुण्य से होता है।''
B. ``सतां सद्भि: सङ्ग: कथमपि हि पुष्येन भवति'' यह सूक्ति उत्तरामचरितम् नाटक के द्वितीय अङ्क से उद्धृत है। इसका तात्पर्य है, ``सज्जनों का सज्जनों से मिलन बड़े पुण्य से होता है।''