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Q: संस्कृतप्रायो नटाश्रय: वाग्व्यापार: किं कथ्यते?
  • A. आरभटीवृत्ति:
  • B. प्रस्तावना
  • C. भारतीवृत्ति:
  • D. पताका
Correct Answer: Option C - संस्कृतप्रायो नटाश्रय: वाग्व्यापार: भारती वृत्ति: कथ्यते। अर्थात् संस्कृतप्राय नट पर आश्रित वाणी रूपी व्यापार भारती वृत्ति कहलाती है। वृत्तियाँ मुख्यत: सात्त्वती, कैशिकी, आरभटी तथा भारती वृत्ति के भेद से चार प्रकार की होती है। भारती प्ररोचना, वीथी, प्रहसन तथा आमुख से युक्त होती है। शृङ्गारे कैशिकी, वीरे सात्त्वत्यारभटी पुन:। रसे रौद्रे च वीभत्से, वृत्ति: सर्वत्र भारती।। भारती वृत्ति सभी रसों में रहती है अत: विकल्प (c) सही है। प्रस्तावना को आमुख कहते हैं यह भारती वृत्ति का ही एक भेद है तथा पताका प्रासङ्गिक कथा वस्तु का एक भेद है।
C. संस्कृतप्रायो नटाश्रय: वाग्व्यापार: भारती वृत्ति: कथ्यते। अर्थात् संस्कृतप्राय नट पर आश्रित वाणी रूपी व्यापार भारती वृत्ति कहलाती है। वृत्तियाँ मुख्यत: सात्त्वती, कैशिकी, आरभटी तथा भारती वृत्ति के भेद से चार प्रकार की होती है। भारती प्ररोचना, वीथी, प्रहसन तथा आमुख से युक्त होती है। शृङ्गारे कैशिकी, वीरे सात्त्वत्यारभटी पुन:। रसे रौद्रे च वीभत्से, वृत्ति: सर्वत्र भारती।। भारती वृत्ति सभी रसों में रहती है अत: विकल्प (c) सही है। प्रस्तावना को आमुख कहते हैं यह भारती वृत्ति का ही एक भेद है तथा पताका प्रासङ्गिक कथा वस्तु का एक भेद है।

Explanations:

संस्कृतप्रायो नटाश्रय: वाग्व्यापार: भारती वृत्ति: कथ्यते। अर्थात् संस्कृतप्राय नट पर आश्रित वाणी रूपी व्यापार भारती वृत्ति कहलाती है। वृत्तियाँ मुख्यत: सात्त्वती, कैशिकी, आरभटी तथा भारती वृत्ति के भेद से चार प्रकार की होती है। भारती प्ररोचना, वीथी, प्रहसन तथा आमुख से युक्त होती है। शृङ्गारे कैशिकी, वीरे सात्त्वत्यारभटी पुन:। रसे रौद्रे च वीभत्से, वृत्ति: सर्वत्र भारती।। भारती वृत्ति सभी रसों में रहती है अत: विकल्प (c) सही है। प्रस्तावना को आमुख कहते हैं यह भारती वृत्ति का ही एक भेद है तथा पताका प्रासङ्गिक कथा वस्तु का एक भेद है।