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Q: संस्कृत व्याकरण में मान्य कारकों की संख्या है
  • A. पाँच
  • B. छह
  • C. सात
  • D. आठ
Correct Answer: Option B - संस्कृत व्याकरण में मान्य कारकों की संख्या छह है। संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से वाक्य के अन्य शब्दों के साथ उनका सम्बन्ध समुचित हो, उसे कारक कहते हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि संज्ञा या सर्वनाम के आगे जब ने, को, से आदि विभक्तियां लगती हैं, तब उनका रूप ही कारक कहलाता है। हिन्दी में कारकों की संख्या आठ होती है। कारक उसे कहते हैं जो क्रिया का अन्वय करे। जिसे संस्कृत में कहते हैं- ‘‘क्रियान्वयित्वं कारकत्वम्’’
B. संस्कृत व्याकरण में मान्य कारकों की संख्या छह है। संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से वाक्य के अन्य शब्दों के साथ उनका सम्बन्ध समुचित हो, उसे कारक कहते हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि संज्ञा या सर्वनाम के आगे जब ने, को, से आदि विभक्तियां लगती हैं, तब उनका रूप ही कारक कहलाता है। हिन्दी में कारकों की संख्या आठ होती है। कारक उसे कहते हैं जो क्रिया का अन्वय करे। जिसे संस्कृत में कहते हैं- ‘‘क्रियान्वयित्वं कारकत्वम्’’

Explanations:

संस्कृत व्याकरण में मान्य कारकों की संख्या छह है। संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से वाक्य के अन्य शब्दों के साथ उनका सम्बन्ध समुचित हो, उसे कारक कहते हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि संज्ञा या सर्वनाम के आगे जब ने, को, से आदि विभक्तियां लगती हैं, तब उनका रूप ही कारक कहलाता है। हिन्दी में कारकों की संख्या आठ होती है। कारक उसे कहते हैं जो क्रिया का अन्वय करे। जिसे संस्कृत में कहते हैं- ‘‘क्रियान्वयित्वं कारकत्वम्’’