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Q: संस्कृत का महाकाव्य ‘कुमारसम्भव’ किसकी रचना है?
  • A. भारवि
  • B. कालिदास
  • C. भवभूति
  • D. भरतमुनि
Correct Answer: Option B - व्याख्या- संस्कृत के महाकाव्य ‘कुमारसम्भव’ कालिदास की रचना है। इस ग्रंथ में 17 सर्ग तथा कथा के तीन सूत्र है-शिवपार्वती का विवाह, कार्तिकेय का जन्म एवं कार्तिकेय द्वारा तारकासुर का वध। कालिदास का एक और महाकाव्य रघुवंशम है जिसमें 19 सर्ग है। जिसमें राजा दिलीप से लेकर अग्निवर्ण तक इक्ष्वाकुवंशीय राजाओं का वर्णन है। यह शृंगार रस प्रधान ग्रंथ है। इसका उपजीव्य ग्रंथ पद्मपुराण तथा रामायण है।
B. व्याख्या- संस्कृत के महाकाव्य ‘कुमारसम्भव’ कालिदास की रचना है। इस ग्रंथ में 17 सर्ग तथा कथा के तीन सूत्र है-शिवपार्वती का विवाह, कार्तिकेय का जन्म एवं कार्तिकेय द्वारा तारकासुर का वध। कालिदास का एक और महाकाव्य रघुवंशम है जिसमें 19 सर्ग है। जिसमें राजा दिलीप से लेकर अग्निवर्ण तक इक्ष्वाकुवंशीय राजाओं का वर्णन है। यह शृंगार रस प्रधान ग्रंथ है। इसका उपजीव्य ग्रंथ पद्मपुराण तथा रामायण है।

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व्याख्या- संस्कृत के महाकाव्य ‘कुमारसम्भव’ कालिदास की रचना है। इस ग्रंथ में 17 सर्ग तथा कथा के तीन सूत्र है-शिवपार्वती का विवाह, कार्तिकेय का जन्म एवं कार्तिकेय द्वारा तारकासुर का वध। कालिदास का एक और महाकाव्य रघुवंशम है जिसमें 19 सर्ग है। जिसमें राजा दिलीप से लेकर अग्निवर्ण तक इक्ष्वाकुवंशीय राजाओं का वर्णन है। यह शृंगार रस प्रधान ग्रंथ है। इसका उपजीव्य ग्रंथ पद्मपुराण तथा रामायण है।