Correct Answer:
Option C - ‘संस्कृत कवि ‘भवभूति’ ने अपने लिए ‘पद वाक्य प्रमाणज्ञ’ विशेषण का प्रयोग किया है। संस्कृत साहित्य के प्रसिद्ध नाटककार भवभूति ने ‘‘एको रस : करुण एव’’ कहकर करुण रस को ही नाटक का अंगीरस माना है। इनके 3 रूपक हैं- मालती माधव, महावीर चरितम् तथा उत्तररामचरित।
उत्तररामचरित इनकी सर्वश्रेष्ठ रचना है। ‘ज्ञाननिधि’ इनके गुरु थे। ‘उत्तररामचरित’ में सीता निर्वासन की कथा मुख्य है। ‘महावीरचरितम्’ वीर रस प्रधान नाटक है। मालतीमाधव 10 अंको का प्रकरण है, जिसमें मालती और माधव की कल्पनाप्रसूत प्रेमकथा है।
सम्प्रदाय और उनके संस्थापक निम्न हैं-
स्मार्त सम्प्रदाय - शंकराचार्य
रूद्र सम्प्रदाय - विष्णु स्वामी
निम्बार्क सम्प्रदाय - निम्बार्काचार्य
सखी/हरिदासी सम्प्रदाय - स्वामी हरिदास
गौड़ीय सम्प्रदाय - चैतन्य महाप्रभु
राधा वल्लभ सम्प्रदाय - हितहरिवंश
C. ‘संस्कृत कवि ‘भवभूति’ ने अपने लिए ‘पद वाक्य प्रमाणज्ञ’ विशेषण का प्रयोग किया है। संस्कृत साहित्य के प्रसिद्ध नाटककार भवभूति ने ‘‘एको रस : करुण एव’’ कहकर करुण रस को ही नाटक का अंगीरस माना है। इनके 3 रूपक हैं- मालती माधव, महावीर चरितम् तथा उत्तररामचरित।
उत्तररामचरित इनकी सर्वश्रेष्ठ रचना है। ‘ज्ञाननिधि’ इनके गुरु थे। ‘उत्तररामचरित’ में सीता निर्वासन की कथा मुख्य है। ‘महावीरचरितम्’ वीर रस प्रधान नाटक है। मालतीमाधव 10 अंको का प्रकरण है, जिसमें मालती और माधव की कल्पनाप्रसूत प्रेमकथा है।
सम्प्रदाय और उनके संस्थापक निम्न हैं-
स्मार्त सम्प्रदाय - शंकराचार्य
रूद्र सम्प्रदाय - विष्णु स्वामी
निम्बार्क सम्प्रदाय - निम्बार्काचार्य
सखी/हरिदासी सम्प्रदाय - स्वामी हरिदास
गौड़ीय सम्प्रदाय - चैतन्य महाप्रभु
राधा वल्लभ सम्प्रदाय - हितहरिवंश