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Q: संस्कृत के किस ग्रन्थ का आरम्भ ‘श्री’ शब्द से तथा समापन ‘लक्ष्मी’ शब्द से हुआ है?
  • A. रघुवंशम्
  • B. शिशुपाल वघम्
  • C. किरातार्जुनीयम्
  • D. कुमारसंभवम्
Correct Answer: Option C - किरातार्जुनीयम् ग्रन्थ का आरम्भ ‘श्री’ शब्द से तथा समापन ‘लक्ष्मी’ शब्द से हुआ है। महाकवि भारवि द्वारा 7वीं शती ई. में रचित इस महाकाव्य को संस्कृत साहित्य के ‘वृहत्त्रयी’ में स्थान प्राप्त है। इसका आधार महाभारत में वर्णित किरात वेशधारी शिव के साथ अर्जुन के युद्ध की लघुकथा है। • संस्कृत की ‘वृहत्त्रयी’ → शिशुपालवधम् (महाकवि माघ) → नैषधीयचरितम् (श्री हर्ष) → किरातार्जुनीयम् (भारवि)
C. किरातार्जुनीयम् ग्रन्थ का आरम्भ ‘श्री’ शब्द से तथा समापन ‘लक्ष्मी’ शब्द से हुआ है। महाकवि भारवि द्वारा 7वीं शती ई. में रचित इस महाकाव्य को संस्कृत साहित्य के ‘वृहत्त्रयी’ में स्थान प्राप्त है। इसका आधार महाभारत में वर्णित किरात वेशधारी शिव के साथ अर्जुन के युद्ध की लघुकथा है। • संस्कृत की ‘वृहत्त्रयी’ → शिशुपालवधम् (महाकवि माघ) → नैषधीयचरितम् (श्री हर्ष) → किरातार्जुनीयम् (भारवि)

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किरातार्जुनीयम् ग्रन्थ का आरम्भ ‘श्री’ शब्द से तथा समापन ‘लक्ष्मी’ शब्द से हुआ है। महाकवि भारवि द्वारा 7वीं शती ई. में रचित इस महाकाव्य को संस्कृत साहित्य के ‘वृहत्त्रयी’ में स्थान प्राप्त है। इसका आधार महाभारत में वर्णित किरात वेशधारी शिव के साथ अर्जुन के युद्ध की लघुकथा है। • संस्कृत की ‘वृहत्त्रयी’ → शिशुपालवधम् (महाकवि माघ) → नैषधीयचरितम् (श्री हर्ष) → किरातार्जुनीयम् (भारवि)