Correct Answer:
Option B - अमरसिंह द्वारा रचित ग्रन्थ अमरकोश में पुराणों के पाँच लक्षण माने गए हैं – सर्ग (सृष्टि), प्रतिसर्ग (प्रलय, पुनर्जन्म), वंश (देवता व ऋषि सूची), मन्वन्तर (चौदह मनु के काल) और वंशानुचरित (सूर्य चंद्रादि वंशीय चरित)। सर्ग में पंचमहाभूत, इंद्रियगण, बुद्धि आदि तत्वों की उत्पत्ति का वर्णन है। प्रतिसर्ग में सम्पूर्ण चराचर जगत के निर्माण का वर्णन है। वंश में देवता एवं ऋषियों आदि वंशों का वर्णन है। मन्वन्तर में मनु, मनुपुत्र देव, सप्तर्षि, इंद्र और भगवानादि के अवतारों का वर्णन है। वंशानुचरित में प्रतिवंश के प्रसिद्ध पुरुषों का वर्णन है। पुराणों की कुल संख्या 18 है। पुराणों को पंचम वेद भी कहा जाता है और इनके रचयिता लोमहर्ष और उनके पुत्र उग्रश्रवा माने जाते हैं। वायु पुराण में महानदी का पौराणिक नाम नीलोत्पला मिलता है। यह संस्कृत का विश्वकोश कहलाता है।
B. अमरसिंह द्वारा रचित ग्रन्थ अमरकोश में पुराणों के पाँच लक्षण माने गए हैं – सर्ग (सृष्टि), प्रतिसर्ग (प्रलय, पुनर्जन्म), वंश (देवता व ऋषि सूची), मन्वन्तर (चौदह मनु के काल) और वंशानुचरित (सूर्य चंद्रादि वंशीय चरित)। सर्ग में पंचमहाभूत, इंद्रियगण, बुद्धि आदि तत्वों की उत्पत्ति का वर्णन है। प्रतिसर्ग में सम्पूर्ण चराचर जगत के निर्माण का वर्णन है। वंश में देवता एवं ऋषियों आदि वंशों का वर्णन है। मन्वन्तर में मनु, मनुपुत्र देव, सप्तर्षि, इंद्र और भगवानादि के अवतारों का वर्णन है। वंशानुचरित में प्रतिवंश के प्रसिद्ध पुरुषों का वर्णन है। पुराणों की कुल संख्या 18 है। पुराणों को पंचम वेद भी कहा जाता है और इनके रचयिता लोमहर्ष और उनके पुत्र उग्रश्रवा माने जाते हैं। वायु पुराण में महानदी का पौराणिक नाम नीलोत्पला मिलता है। यह संस्कृत का विश्वकोश कहलाता है।