Correct Answer:
Option C - ‘साहित्य लहरी’ सूरदास की रचना है।
⇒ साहित्य लहरी में सुप्रसिद्ध 118 दृष्टिकूट पद है। इसमें अर्थगोपन शैली में राधा कृष्ण की लीलाओं का वर्णन है। साथ ही, अलंकार व नायिका-भेद वर्णन है।
⇒ ‘साहित्य लहरी’ के अंत में एक पद में सूरदास ने अपनी वंश परम्परा बताई है। सूरसारावली व साहित्य लहरी को ब्रजेश्वर वर्मा व बच्चन सिंह ने अप्रामाणिक माना।
⇒ कृष्ण गीतावली और दोहावली तुलसीदास की रचना है। कृष्ण गीतावली (सं. 1943-60) ब्रज भाषा में लिखा गीति-काव्य है। इसमें गोस्वामी जी ने कृष्ण से सम्बन्धी पदों की रचना की इसमें कुल 61 पद है।
⇒ दोहावली सं. (1626-80)-दोहावली ब्रज भाषा में लिखा मुक्तफ काव्य है। इसमें 573 दोहे संकलित है। यह भी गोस्वामी जी के भक्ति, ज्ञान, वैराग्य, सदाचार, नीति का अक्षय अनुभव कोश है। इनमें से कुछ दोहे रामचरित मानस और रामाज्ञा प्रश्न आदि ग्रंथों में भी मिलते है।
C. ‘साहित्य लहरी’ सूरदास की रचना है।
⇒ साहित्य लहरी में सुप्रसिद्ध 118 दृष्टिकूट पद है। इसमें अर्थगोपन शैली में राधा कृष्ण की लीलाओं का वर्णन है। साथ ही, अलंकार व नायिका-भेद वर्णन है।
⇒ ‘साहित्य लहरी’ के अंत में एक पद में सूरदास ने अपनी वंश परम्परा बताई है। सूरसारावली व साहित्य लहरी को ब्रजेश्वर वर्मा व बच्चन सिंह ने अप्रामाणिक माना।
⇒ कृष्ण गीतावली और दोहावली तुलसीदास की रचना है। कृष्ण गीतावली (सं. 1943-60) ब्रज भाषा में लिखा गीति-काव्य है। इसमें गोस्वामी जी ने कृष्ण से सम्बन्धी पदों की रचना की इसमें कुल 61 पद है।
⇒ दोहावली सं. (1626-80)-दोहावली ब्रज भाषा में लिखा मुक्तफ काव्य है। इसमें 573 दोहे संकलित है। यह भी गोस्वामी जी के भक्ति, ज्ञान, वैराग्य, सदाचार, नीति का अक्षय अनुभव कोश है। इनमें से कुछ दोहे रामचरित मानस और रामाज्ञा प्रश्न आदि ग्रंथों में भी मिलते है।