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Q: स्रष्टु: आद्या सृष्टि: का?
  • A. आकाश:
  • B. अग्नि:
  • C. जलम्
  • D. पृथिवी
Correct Answer: Option C - स्रष्टु: आद्या सृष्टि: जलम्। अर्थात् विधाता की जो सर्वप्रथम सृष्टि है- वह है जलरूप मूर्ति, विधिपूर्वक दी गयी आहुतियों का वहन करने वाली अग्नि की मूर्ति, तथा हवि प्रदान करने वाली यजमानरूपमूर्ति, दिन-रात इन दो समयों का निर्धारण करने वाली सूर्य-चन्द्र मूर्ति, जो श्रवण का विषय या देवता है और सम्पूर्ण विश्व में व्याप्त है, वह आकाशरूप मूर्ति, सम्पूर्ण चराचर की बीजभूता धरित्री देवी पृथ्वी रूपमूर्ति और जो समस्त प्राणियों का प्राण-संचार करने वाली वायुरूप मूर्ति है इन प्रत्यक्ष 8 मूर्तियों से व्याप्त भगवान सर्वेश्वर शिव आप सबकी रक्षा करें।
C. स्रष्टु: आद्या सृष्टि: जलम्। अर्थात् विधाता की जो सर्वप्रथम सृष्टि है- वह है जलरूप मूर्ति, विधिपूर्वक दी गयी आहुतियों का वहन करने वाली अग्नि की मूर्ति, तथा हवि प्रदान करने वाली यजमानरूपमूर्ति, दिन-रात इन दो समयों का निर्धारण करने वाली सूर्य-चन्द्र मूर्ति, जो श्रवण का विषय या देवता है और सम्पूर्ण विश्व में व्याप्त है, वह आकाशरूप मूर्ति, सम्पूर्ण चराचर की बीजभूता धरित्री देवी पृथ्वी रूपमूर्ति और जो समस्त प्राणियों का प्राण-संचार करने वाली वायुरूप मूर्ति है इन प्रत्यक्ष 8 मूर्तियों से व्याप्त भगवान सर्वेश्वर शिव आप सबकी रक्षा करें।

Explanations:

स्रष्टु: आद्या सृष्टि: जलम्। अर्थात् विधाता की जो सर्वप्रथम सृष्टि है- वह है जलरूप मूर्ति, विधिपूर्वक दी गयी आहुतियों का वहन करने वाली अग्नि की मूर्ति, तथा हवि प्रदान करने वाली यजमानरूपमूर्ति, दिन-रात इन दो समयों का निर्धारण करने वाली सूर्य-चन्द्र मूर्ति, जो श्रवण का विषय या देवता है और सम्पूर्ण विश्व में व्याप्त है, वह आकाशरूप मूर्ति, सम्पूर्ण चराचर की बीजभूता धरित्री देवी पृथ्वी रूपमूर्ति और जो समस्त प्राणियों का प्राण-संचार करने वाली वायुरूप मूर्ति है इन प्रत्यक्ष 8 मूर्तियों से व्याप्त भगवान सर्वेश्वर शिव आप सबकी रक्षा करें।