Correct Answer:
Option B - `पंचानन' का अर्थ पाँच है आनन जिसके अर्थात् `शंकर' या ‘सिंह’। यह बहुव्रीहि समास है। बहुव्रीहि समास में कोई पद प्रधान नहीं होता तथा दोनों पद मिलकर किसी तीसरे पद की ओर संकेत करते हैं। जैसे- लम्बोदर, दशानन, चक्रपाणि आदि। जिस समास का अंतिम पद प्रधान हो वहाँ तत्पुरुष समास होता है। जैसे- माखनचोर, गगनचुम्बी, रसभरा, पाकिटमार आदि। जिस समास का पहला पद विशेषण तथा दूसरा पद विशेष्य (संज्ञा) हो वहाँ कर्मधारय समास होता है। जैसे- महाकवि, महात्मा, परमेश्वर, नील कमल आदि। जिस समास का प्रथम पद संख्यावाची तथा दूसरा पद संज्ञा हो वहाँ द्विगु समास होता है। जैसे- त्रिभुज, अठन्नी, नवग्रह, पंचवटी, नवरत्न, आदि।
B. `पंचानन' का अर्थ पाँच है आनन जिसके अर्थात् `शंकर' या ‘सिंह’। यह बहुव्रीहि समास है। बहुव्रीहि समास में कोई पद प्रधान नहीं होता तथा दोनों पद मिलकर किसी तीसरे पद की ओर संकेत करते हैं। जैसे- लम्बोदर, दशानन, चक्रपाणि आदि। जिस समास का अंतिम पद प्रधान हो वहाँ तत्पुरुष समास होता है। जैसे- माखनचोर, गगनचुम्बी, रसभरा, पाकिटमार आदि। जिस समास का पहला पद विशेषण तथा दूसरा पद विशेष्य (संज्ञा) हो वहाँ कर्मधारय समास होता है। जैसे- महाकवि, महात्मा, परमेश्वर, नील कमल आदि। जिस समास का प्रथम पद संख्यावाची तथा दूसरा पद संज्ञा हो वहाँ द्विगु समास होता है। जैसे- त्रिभुज, अठन्नी, नवग्रह, पंचवटी, नवरत्न, आदि।