Explanations:
‘सन्तप्तानां त्वमसि शरणम्’ - अत्र सन्तप्तानां रक्षक: मेघ:।’ अर्थात् हे मेघ! तुम (विरह) पीडि़तों के रक्षक हो। मेघदूतम् महाकवि कालिदास रचित एक खण्डकाव्य है। इसमें एक यक्ष की कथा है जिसे कुबेर अलकापुरी से निष्कासित कर देता है। निष्काषित यक्ष रामगिरि पर्वत पर निवास करता है। मेघदूतम् का नायक यक्ष धीरललित नायक है। यक्षिणी स्वकीया एवं पद्मिनी नायिका है। इसमें प्रसाद एवं माधुर्यगुण की प्रधानता है। ‘मेघ: एव दूत: यस्मिन् काव्ये तत् ‘मेघदूतम्’