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Q: सनि कज्जल, चष झष लगन उपज्यो सुदिन सनेहु। क्यों न नृपति हवै भोगवै, लहि सुदेसु सबु देहु।। - बिहारी के उपर्युक्त दोहे में उनकी बहुज्ञाता का कौन-सा पक्ष प्रकट हुआ है?
  • A. वैद्यक ज्ञान
  • B. राजनीति
  • C. देशाटन
  • D. ज्योतिष ज्ञान
Correct Answer: Option D - सनि कज्जल, चष झष लगन उपज्यो सुदिन सनेहु। क्यों न नृपति हवै भोगवे, लहि सुदेसु सबु देहु।। अर्थात् सखी नायिका से कह रही है कि काजल रूपी शनिग्रह के नेत्र रूपी मीन राशि में स्थित होने से शुभ मुहुर्त में जो स्नेह रूपी शिशु उत्पन्न हुआ है, वह राजा होकर संपूर्ण शरीर रूपी सुंदर प्रदेश को क्यों नहीं भोगेगा। उपर्युक्त दोहे में बिहारी के ज्योतिष ज्ञान की बहुज्ञता का पक्ष प्रकट हुआ है।
D. सनि कज्जल, चष झष लगन उपज्यो सुदिन सनेहु। क्यों न नृपति हवै भोगवे, लहि सुदेसु सबु देहु।। अर्थात् सखी नायिका से कह रही है कि काजल रूपी शनिग्रह के नेत्र रूपी मीन राशि में स्थित होने से शुभ मुहुर्त में जो स्नेह रूपी शिशु उत्पन्न हुआ है, वह राजा होकर संपूर्ण शरीर रूपी सुंदर प्रदेश को क्यों नहीं भोगेगा। उपर्युक्त दोहे में बिहारी के ज्योतिष ज्ञान की बहुज्ञता का पक्ष प्रकट हुआ है।

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सनि कज्जल, चष झष लगन उपज्यो सुदिन सनेहु। क्यों न नृपति हवै भोगवे, लहि सुदेसु सबु देहु।। अर्थात् सखी नायिका से कह रही है कि काजल रूपी शनिग्रह के नेत्र रूपी मीन राशि में स्थित होने से शुभ मुहुर्त में जो स्नेह रूपी शिशु उत्पन्न हुआ है, वह राजा होकर संपूर्ण शरीर रूपी सुंदर प्रदेश को क्यों नहीं भोगेगा। उपर्युक्त दोहे में बिहारी के ज्योतिष ज्ञान की बहुज्ञता का पक्ष प्रकट हुआ है।