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Q: `समत्वं योग उच्यते' किस ग्रन्थ से सम्बन्धित है?
  • A. योगशास्त्र
  • B. वेदान्त दर्शन
  • C. गीता
  • D. उपनिषद्
Correct Answer: Option C - `समत्वं योग उच्यते' गीता के द्वितीय अध्याय से सम्बन्धित है। गीता अध्याय 2 श्लोक 48 में कहा गया है– योगस्थ: कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय। सिद्धयसिद्धयो: समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते।।48 हे धनञ्जय! तू आसक्ति को त्याग कर तथा सिद्धि और असिद्धि में समान बुद्धि वाला होकर योग में स्थित हुआ कत्र्तव्यकर्मों को कर, समत्व ही योग कहलाता है।
C. `समत्वं योग उच्यते' गीता के द्वितीय अध्याय से सम्बन्धित है। गीता अध्याय 2 श्लोक 48 में कहा गया है– योगस्थ: कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय। सिद्धयसिद्धयो: समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते।।48 हे धनञ्जय! तू आसक्ति को त्याग कर तथा सिद्धि और असिद्धि में समान बुद्धि वाला होकर योग में स्थित हुआ कत्र्तव्यकर्मों को कर, समत्व ही योग कहलाता है।

Explanations:

`समत्वं योग उच्यते' गीता के द्वितीय अध्याय से सम्बन्धित है। गीता अध्याय 2 श्लोक 48 में कहा गया है– योगस्थ: कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय। सिद्धयसिद्धयो: समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते।।48 हे धनञ्जय! तू आसक्ति को त्याग कर तथा सिद्धि और असिद्धि में समान बुद्धि वाला होकर योग में स्थित हुआ कत्र्तव्यकर्मों को कर, समत्व ही योग कहलाता है।