Correct Answer:
Option A - शक्ति संतुलन एक गतिशील अवधारणा है, जो कि आंतरिक और वाह्य कारकों की वजह से निरंतर परिवर्तनशील है। यह परिवर्तन शक्ति की साम्यावस्था और वैषम्यावस्था दोनो रूपों में स्पष्ट होता है। विश्व व्यवस्था में जब कोई राज्य अधिक शक्ति ग्रहण कर लेता है तो उसके विरोधी राज्य शक्ति में संतुलन लाने के लिए क्रियाशील हो जाते हैं।
A. शक्ति संतुलन एक गतिशील अवधारणा है, जो कि आंतरिक और वाह्य कारकों की वजह से निरंतर परिवर्तनशील है। यह परिवर्तन शक्ति की साम्यावस्था और वैषम्यावस्था दोनो रूपों में स्पष्ट होता है। विश्व व्यवस्था में जब कोई राज्य अधिक शक्ति ग्रहण कर लेता है तो उसके विरोधी राज्य शक्ति में संतुलन लाने के लिए क्रियाशील हो जाते हैं।