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Q: समासं करोतु - कृष्णं श्रित:
  • A. कृष्णाश्रित:
  • B. कृष्णश्रित:
  • C. कृष्णेश्रित:
  • D. कृष्णीश्रित:
Correct Answer: Option B - समासं करोतु - कृष्णं श्रित: - कृष्णश्रित: सूत्र- द्वितीया श्रितातीत - पतित - गतात्यस्त - प्राप्तापन्नै: अर्थात् द्वितीया विभक्ति से युक्त समर्थ सुबन्त का श्रित, अतीत, पतित, गत, अत्यस्त, प्राप्त और आपन्न जैसे प्रकृति के शब्दों की समर्थ सुबन्त के साथ विकल्प से समास होता है और वह समास तत्पुरुष संज्ञक होता है। कृष्णश्रित: का अलौकिक विग्रह-कृष्ण अम् श्रित सु होगा।
B. समासं करोतु - कृष्णं श्रित: - कृष्णश्रित: सूत्र- द्वितीया श्रितातीत - पतित - गतात्यस्त - प्राप्तापन्नै: अर्थात् द्वितीया विभक्ति से युक्त समर्थ सुबन्त का श्रित, अतीत, पतित, गत, अत्यस्त, प्राप्त और आपन्न जैसे प्रकृति के शब्दों की समर्थ सुबन्त के साथ विकल्प से समास होता है और वह समास तत्पुरुष संज्ञक होता है। कृष्णश्रित: का अलौकिक विग्रह-कृष्ण अम् श्रित सु होगा।

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समासं करोतु - कृष्णं श्रित: - कृष्णश्रित: सूत्र- द्वितीया श्रितातीत - पतित - गतात्यस्त - प्राप्तापन्नै: अर्थात् द्वितीया विभक्ति से युक्त समर्थ सुबन्त का श्रित, अतीत, पतित, गत, अत्यस्त, प्राप्त और आपन्न जैसे प्रकृति के शब्दों की समर्थ सुबन्त के साथ विकल्प से समास होता है और वह समास तत्पुरुष संज्ञक होता है। कृष्णश्रित: का अलौकिक विग्रह-कृष्ण अम् श्रित सु होगा।