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Q: सांख्यदर्शनस्य सिद्धान्तोऽस्ति
  • A. सत्कार्यवाद:
  • B. असत्कार्यवाद:
  • C. विवर्तवाद:
  • D. आरम्भवाद:
Correct Answer: Option A - सांख्यदर्शनस्य सिद्धान्तोऽस्ति- सत्कार्यवाद:। सत्कार्यवाद सांख्य दर्शन का प्रमुख सिद्धान्त है। इस सिद्धान्त के अनुसार बिना कारण के कार्य की उत्पत्ति नहीं हो सकती। फलत: इस जगत की उत्पत्ति शून्य से नहीं किसी मूल सत्ता से है। यह सिद्धान्त बौद्धों के सिद्धान्त के विपरीत है। कार्य अपनी उत्पत्ति के पूर्व कारण में विद्यमान रहता है। कार्य अपने कारण का सार है। कार्य तथा कारण वस्तुत: समान प्रक्रिया के व्यक्त-अव्यक्त रूप हैं। सत्कार्यवाद के दो भेद हैं- (i) परिणामवाद (ii) विवर्तवाद
A. सांख्यदर्शनस्य सिद्धान्तोऽस्ति- सत्कार्यवाद:। सत्कार्यवाद सांख्य दर्शन का प्रमुख सिद्धान्त है। इस सिद्धान्त के अनुसार बिना कारण के कार्य की उत्पत्ति नहीं हो सकती। फलत: इस जगत की उत्पत्ति शून्य से नहीं किसी मूल सत्ता से है। यह सिद्धान्त बौद्धों के सिद्धान्त के विपरीत है। कार्य अपनी उत्पत्ति के पूर्व कारण में विद्यमान रहता है। कार्य अपने कारण का सार है। कार्य तथा कारण वस्तुत: समान प्रक्रिया के व्यक्त-अव्यक्त रूप हैं। सत्कार्यवाद के दो भेद हैं- (i) परिणामवाद (ii) विवर्तवाद

Explanations:

सांख्यदर्शनस्य सिद्धान्तोऽस्ति- सत्कार्यवाद:। सत्कार्यवाद सांख्य दर्शन का प्रमुख सिद्धान्त है। इस सिद्धान्त के अनुसार बिना कारण के कार्य की उत्पत्ति नहीं हो सकती। फलत: इस जगत की उत्पत्ति शून्य से नहीं किसी मूल सत्ता से है। यह सिद्धान्त बौद्धों के सिद्धान्त के विपरीत है। कार्य अपनी उत्पत्ति के पूर्व कारण में विद्यमान रहता है। कार्य अपने कारण का सार है। कार्य तथा कारण वस्तुत: समान प्रक्रिया के व्यक्त-अव्यक्त रूप हैं। सत्कार्यवाद के दो भेद हैं- (i) परिणामवाद (ii) विवर्तवाद