Correct Answer:
Option C - सांख्यकारिकानुसारेण सृष्टि: ‘प्रकृतिपुरुषसंयोगात्’ भवति। अर्थात् सांख्यकारिका के अनुसार सृष्टि प्रकृति-पुरुष के संयोग (मिलन) से होती है। जिस प्रकार गमन शक्ति विहीन पङ्गु (लँगड़ा) और दर्शन शक्ति विहीन अन्धा एक-दूसरे के सहयोग से अपने गन्तव्य को प्राप्त करता है उसी प्रकार (पुरुष के द्वारा) प्रधान के दर्शन अर्थात् भोग के लिए तथा (प्रधान के द्वारा) पुरुष के कैवल्य (मोक्ष) के लिए इन दोनों प्रधान और पुरुष का संयोग होता है और उस संयोग से सृष्टि होती है। अत: चेतनाविहीन होने के कारण प्रकृति को अन्धा तथा निष्क्रिय होने के कारण पुरुष को लँगड़ा कहा गया है। इसमें विकल्प (c) सही है।
C. सांख्यकारिकानुसारेण सृष्टि: ‘प्रकृतिपुरुषसंयोगात्’ भवति। अर्थात् सांख्यकारिका के अनुसार सृष्टि प्रकृति-पुरुष के संयोग (मिलन) से होती है। जिस प्रकार गमन शक्ति विहीन पङ्गु (लँगड़ा) और दर्शन शक्ति विहीन अन्धा एक-दूसरे के सहयोग से अपने गन्तव्य को प्राप्त करता है उसी प्रकार (पुरुष के द्वारा) प्रधान के दर्शन अर्थात् भोग के लिए तथा (प्रधान के द्वारा) पुरुष के कैवल्य (मोक्ष) के लिए इन दोनों प्रधान और पुरुष का संयोग होता है और उस संयोग से सृष्टि होती है। अत: चेतनाविहीन होने के कारण प्रकृति को अन्धा तथा निष्क्रिय होने के कारण पुरुष को लँगड़ा कहा गया है। इसमें विकल्प (c) सही है।