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Q: स्कूल की बच्चों के सामाजीकरण में क्या भूमिका हैं?
  • A. कोई भूमिका नहीं है।
  • B. प्राथमिक सामाजीकरण की संस्था है।
  • C. द्वितीयक सामाजीकरण की संस्था है।
  • D. तृतीयक सामाजीकरण की संस्था है।
Correct Answer: Option C - विद्यालय शिक्षा का महत्वपूर्ण, श्रेष्ठ तथा सक्रिय साधन है। बालक के सामाजीकरण में विद्यालय/स्कूल द्वितीयक संस्था के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जॉन डीवी के अनुसार, ‘‘विद्यालय ऐसा विशिष्ट वातावरण है जहाँ जीवन के गुणों तथा विशिष्ट क्रियाओं और व्यवसायों की शिक्षा बालक के अन्तर्निहित मानसिक विकास के लिए दी जाती है।’’ द्वितीयक समाजीकरण तब होता है जब शिशु बाल्यावस्था से आगे बढ़ जाता है और परिपक्वता प्राप्त कर रहा होता है। यह विद्यालय, सहकर्मी समूहों, मीडिया, धार्मिक संस्थानों आदि जैसे संस्थाओं के माध्यम से शुरू होता है।
C. विद्यालय शिक्षा का महत्वपूर्ण, श्रेष्ठ तथा सक्रिय साधन है। बालक के सामाजीकरण में विद्यालय/स्कूल द्वितीयक संस्था के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जॉन डीवी के अनुसार, ‘‘विद्यालय ऐसा विशिष्ट वातावरण है जहाँ जीवन के गुणों तथा विशिष्ट क्रियाओं और व्यवसायों की शिक्षा बालक के अन्तर्निहित मानसिक विकास के लिए दी जाती है।’’ द्वितीयक समाजीकरण तब होता है जब शिशु बाल्यावस्था से आगे बढ़ जाता है और परिपक्वता प्राप्त कर रहा होता है। यह विद्यालय, सहकर्मी समूहों, मीडिया, धार्मिक संस्थानों आदि जैसे संस्थाओं के माध्यम से शुरू होता है।

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विद्यालय शिक्षा का महत्वपूर्ण, श्रेष्ठ तथा सक्रिय साधन है। बालक के सामाजीकरण में विद्यालय/स्कूल द्वितीयक संस्था के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जॉन डीवी के अनुसार, ‘‘विद्यालय ऐसा विशिष्ट वातावरण है जहाँ जीवन के गुणों तथा विशिष्ट क्रियाओं और व्यवसायों की शिक्षा बालक के अन्तर्निहित मानसिक विकास के लिए दी जाती है।’’ द्वितीयक समाजीकरण तब होता है जब शिशु बाल्यावस्था से आगे बढ़ जाता है और परिपक्वता प्राप्त कर रहा होता है। यह विद्यालय, सहकर्मी समूहों, मीडिया, धार्मिक संस्थानों आदि जैसे संस्थाओं के माध्यम से शुरू होता है।