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Q: ``सुजन: खलु भृत्यानुकम्पक: स्वामी निर्धनकोऽपि शोभते। पिशुन: पुनर्द्रव्यर्गिवतो दुष्कर: खलु परिणामदारुणा:'' इस श्लोक के ग्रन्थ और उसके कवि हैं –
  • A. मृच्छकटिकम्/शूद्रक
  • B. नीतिशतकम्/भर्तृहरि
  • C. किरातार्जुनीयम्/भारवि
  • D. मेघदूतम्/कालिदास
Correct Answer: Option B - प्रस्तुत श्लोक भर्तृहरि के `नीतिशकतम्' से लिया गया है। नीतिशतक, शृङ्गारशतक और वैराग्यशतक ये तीन शतक शतकत्रय, भर्तृहरि की रचना के रूप में प्राप्त होते हैं। ये तीनों शतक मुक्तककाव्य की कोटि में आते हैं। नीतिशतकम् में 111 श्लोक,शृङ्गारशतकम् में 103 श्लोक हैं तथा वैराग्यशतकम् में भी 111 श्लोक हैं।
B. प्रस्तुत श्लोक भर्तृहरि के `नीतिशकतम्' से लिया गया है। नीतिशतक, शृङ्गारशतक और वैराग्यशतक ये तीन शतक शतकत्रय, भर्तृहरि की रचना के रूप में प्राप्त होते हैं। ये तीनों शतक मुक्तककाव्य की कोटि में आते हैं। नीतिशतकम् में 111 श्लोक,शृङ्गारशतकम् में 103 श्लोक हैं तथा वैराग्यशतकम् में भी 111 श्लोक हैं।

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प्रस्तुत श्लोक भर्तृहरि के `नीतिशकतम्' से लिया गया है। नीतिशतक, शृङ्गारशतक और वैराग्यशतक ये तीन शतक शतकत्रय, भर्तृहरि की रचना के रूप में प्राप्त होते हैं। ये तीनों शतक मुक्तककाव्य की कोटि में आते हैं। नीतिशतकम् में 111 श्लोक,शृङ्गारशतकम् में 103 श्लोक हैं तथा वैराग्यशतकम् में भी 111 श्लोक हैं।