Correct Answer:
Option C - भर्तृहरिकृत नीतिशतकम् के 12वें श्लोक में यह अभिकथन है – साहित्य सङ्गीत कलाविहीन: साक्षात्पशु: पुच्छविषाणहीन:। अर्थात् साहित्य, सङ्गीत और कला से अपरिचित व्यक्ति बिना सींग एवं पूँछ के साक्षात पशु है।
C. भर्तृहरिकृत नीतिशतकम् के 12वें श्लोक में यह अभिकथन है – साहित्य सङ्गीत कलाविहीन: साक्षात्पशु: पुच्छविषाणहीन:। अर्थात् साहित्य, सङ्गीत और कला से अपरिचित व्यक्ति बिना सींग एवं पूँछ के साक्षात पशु है।