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Q: साहित्य के इतिहास लेखन की सबसे विकसित पद्धति है
  • A. कालानुक्रमी पद्धति
  • B. वर्णानुक्रम पद्धति
  • C. विधेयवादी पद्धति
  • D. उपर्युक्त में से एक से अधिक
  • E. उपर्युक्त में से कोई नहीं
Correct Answer: Option C - विधेयवादी पद्धति - यह साहित्य इतिहास लेखन की सर्वाधिक उपयुक्त विधि है। इस विधि के जनक फ्रांसीसी विद्धान तेन माने जाते हैं। इस विधि में साहित्यिक प्रवृत्तियों का विवेचन और विश्लेषण युगीन पद्धतियों के सन्दर्भ में किया जाता है। कालानुक्रमी पद्धति - इस पद्धति में रचनाकारों का परिचय उनके जन्म वर्णानुसार दिया जाता है। जार्ज ग्रियर्सन तथा मिश्रबंधुओं ने अपने इतिहास ग्रंथों में इस विधि का प्रयोग किया है। वर्णानुक्रम पद्धति - इस पद्धति में रचनाओं का परिचय उनके नाम के वर्ण क्रमानुसार दिया जाता है। यह साहित्य इतिहास लेखन की सर्वाधिक दोषपूर्ण प्रणाली है।
C. विधेयवादी पद्धति - यह साहित्य इतिहास लेखन की सर्वाधिक उपयुक्त विधि है। इस विधि के जनक फ्रांसीसी विद्धान तेन माने जाते हैं। इस विधि में साहित्यिक प्रवृत्तियों का विवेचन और विश्लेषण युगीन पद्धतियों के सन्दर्भ में किया जाता है। कालानुक्रमी पद्धति - इस पद्धति में रचनाकारों का परिचय उनके जन्म वर्णानुसार दिया जाता है। जार्ज ग्रियर्सन तथा मिश्रबंधुओं ने अपने इतिहास ग्रंथों में इस विधि का प्रयोग किया है। वर्णानुक्रम पद्धति - इस पद्धति में रचनाओं का परिचय उनके नाम के वर्ण क्रमानुसार दिया जाता है। यह साहित्य इतिहास लेखन की सर्वाधिक दोषपूर्ण प्रणाली है।

Explanations:

विधेयवादी पद्धति - यह साहित्य इतिहास लेखन की सर्वाधिक उपयुक्त विधि है। इस विधि के जनक फ्रांसीसी विद्धान तेन माने जाते हैं। इस विधि में साहित्यिक प्रवृत्तियों का विवेचन और विश्लेषण युगीन पद्धतियों के सन्दर्भ में किया जाता है। कालानुक्रमी पद्धति - इस पद्धति में रचनाकारों का परिचय उनके जन्म वर्णानुसार दिया जाता है। जार्ज ग्रियर्सन तथा मिश्रबंधुओं ने अपने इतिहास ग्रंथों में इस विधि का प्रयोग किया है। वर्णानुक्रम पद्धति - इस पद्धति में रचनाओं का परिचय उनके नाम के वर्ण क्रमानुसार दिया जाता है। यह साहित्य इतिहास लेखन की सर्वाधिक दोषपूर्ण प्रणाली है।