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Q: ‘‘सहसा विदधीत न क्रियामविवेक:’’ किस कवि का प्रिय श्लोक है?
  • A. माघ
  • B. भर्तृहरि
  • C. भारवि
  • D. कालिदास
Correct Answer: Option C - ‘सहसा विदधीत न क्रियामविवेक:’ महाकवि भारविकृत किरातार्जुनीयम् महाकाव्य के द्वितीय सर्ग का 39वां श्लोक है। इसका भावार्थ है कि कोई भी कार्य बिना विवेक के शीघ्रतापूर्वक नहीं करना चाहिए।
C. ‘सहसा विदधीत न क्रियामविवेक:’ महाकवि भारविकृत किरातार्जुनीयम् महाकाव्य के द्वितीय सर्ग का 39वां श्लोक है। इसका भावार्थ है कि कोई भी कार्य बिना विवेक के शीघ्रतापूर्वक नहीं करना चाहिए।

Explanations:

‘सहसा विदधीत न क्रियामविवेक:’ महाकवि भारविकृत किरातार्जुनीयम् महाकाव्य के द्वितीय सर्ग का 39वां श्लोक है। इसका भावार्थ है कि कोई भी कार्य बिना विवेक के शीघ्रतापूर्वक नहीं करना चाहिए।