Correct Answer:
Option B - `किरातार्जुनीयम्' नामक महाकाव्य की रचना महाकवि भारवि ने की थी। `सहसा विदधीत न क्रियाम्' नामक सूक्ति `किरातार्जुनीयम्' में संकलित है। भारवि ने इस प्रिय सूक्ति वाक्य को शयन-कक्ष में लगा रखा था। भारवि के किरातार्जुनीयम् की गणना संस्कृत के तीन वृहत ग्रंथों में की गयी है।
B. `किरातार्जुनीयम्' नामक महाकाव्य की रचना महाकवि भारवि ने की थी। `सहसा विदधीत न क्रियाम्' नामक सूक्ति `किरातार्जुनीयम्' में संकलित है। भारवि ने इस प्रिय सूक्ति वाक्य को शयन-कक्ष में लगा रखा था। भारवि के किरातार्जुनीयम् की गणना संस्कृत के तीन वृहत ग्रंथों में की गयी है।