search
Q: ‘‘स्फुटोपमं भूतिसितेन शम्भुना’’ इत्यस्मिन् वाक्ये कस्य संकेत:?
  • A. नारदस्य
  • B. कण्वस्य
  • C. विश्वामित्रस्य
  • D. वशिष्ठस्य
Correct Answer: Option A - स्फुटोपमं भूतिसितेन शम्भुना इत्यस्मिन् वाक्ये ‘नारदस्य संकेत:’। अर्थात् शरीर पर श्वेत भस्म लपेटे हुए शंकर जी के समान दिखाई पड़ रहे थे। यहाँ पर सफेद भस्म लपेटे हुए नारद जी का बोध हो रहा है। ‘शिशुपालवधम्’ के लेखक ‘माघ’ हैं। ‘शिशुपालवधम्’ में 20 सर्ग हैं। यह एक महाकाव्य है। इस महाकाव्य की गणना बृहत्त्रयी ग्रन्थ के अन्तर्गत होती है।
A. स्फुटोपमं भूतिसितेन शम्भुना इत्यस्मिन् वाक्ये ‘नारदस्य संकेत:’। अर्थात् शरीर पर श्वेत भस्म लपेटे हुए शंकर जी के समान दिखाई पड़ रहे थे। यहाँ पर सफेद भस्म लपेटे हुए नारद जी का बोध हो रहा है। ‘शिशुपालवधम्’ के लेखक ‘माघ’ हैं। ‘शिशुपालवधम्’ में 20 सर्ग हैं। यह एक महाकाव्य है। इस महाकाव्य की गणना बृहत्त्रयी ग्रन्थ के अन्तर्गत होती है।

Explanations:

स्फुटोपमं भूतिसितेन शम्भुना इत्यस्मिन् वाक्ये ‘नारदस्य संकेत:’। अर्थात् शरीर पर श्वेत भस्म लपेटे हुए शंकर जी के समान दिखाई पड़ रहे थे। यहाँ पर सफेद भस्म लपेटे हुए नारद जी का बोध हो रहा है। ‘शिशुपालवधम्’ के लेखक ‘माघ’ हैं। ‘शिशुपालवधम्’ में 20 सर्ग हैं। यह एक महाकाव्य है। इस महाकाव्य की गणना बृहत्त्रयी ग्रन्थ के अन्तर्गत होती है।