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Q: ‘सचेतन कहानी आंदोलन’ के प्रणेता कौन है?
  • A. मोहन राकेश
  • B. कमलेश्वर
  • C. महीप सिंह
  • D. उपर्युक्त में से एक से अधिक
  • E. उपर्युक्त में से कोई नहीं
Correct Answer: Option C - महीप सिंह द्वारा सन् 1964 ई. में ‘सचेतन कहानी’ का आरंभ हुआ था। सर्वप्रथम सचेतन कहानी का विशेषांक ‘आधार’ नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ था। इस आन्दोलन ने जीवन के प्रति सचेतन दृष्टि अपनाने पर बल दिया था। मोहन राकेश जी का साहित्य, आधुनिक हिन्दी साहित्य में ‘मील का पत्थर’ माना जाता है। इनकी रचनाएँ- अँधेरे बंद कमरे, आषाढ़ आदि। कमलेश्वर नई कहानी के प्रचारित त्रिकोण की एक महत्वपूर्ण कड़ी थे। इनकी रचनाएँ - जार्ज पंचम की नाक, राजा निरबंसिया मांस का दरिया, कोहरा इतने अच्छे दिन आदि।
C. महीप सिंह द्वारा सन् 1964 ई. में ‘सचेतन कहानी’ का आरंभ हुआ था। सर्वप्रथम सचेतन कहानी का विशेषांक ‘आधार’ नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ था। इस आन्दोलन ने जीवन के प्रति सचेतन दृष्टि अपनाने पर बल दिया था। मोहन राकेश जी का साहित्य, आधुनिक हिन्दी साहित्य में ‘मील का पत्थर’ माना जाता है। इनकी रचनाएँ- अँधेरे बंद कमरे, आषाढ़ आदि। कमलेश्वर नई कहानी के प्रचारित त्रिकोण की एक महत्वपूर्ण कड़ी थे। इनकी रचनाएँ - जार्ज पंचम की नाक, राजा निरबंसिया मांस का दरिया, कोहरा इतने अच्छे दिन आदि।

Explanations:

महीप सिंह द्वारा सन् 1964 ई. में ‘सचेतन कहानी’ का आरंभ हुआ था। सर्वप्रथम सचेतन कहानी का विशेषांक ‘आधार’ नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ था। इस आन्दोलन ने जीवन के प्रति सचेतन दृष्टि अपनाने पर बल दिया था। मोहन राकेश जी का साहित्य, आधुनिक हिन्दी साहित्य में ‘मील का पत्थर’ माना जाता है। इनकी रचनाएँ- अँधेरे बंद कमरे, आषाढ़ आदि। कमलेश्वर नई कहानी के प्रचारित त्रिकोण की एक महत्वपूर्ण कड़ी थे। इनकी रचनाएँ - जार्ज पंचम की नाक, राजा निरबंसिया मांस का दरिया, कोहरा इतने अच्छे दिन आदि।