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Q: सूचना : अधोलिखितं श्लोकान पठित्वा प्रश्नानां (प्र.सं. 286-291) विकल्पात्मकोत्तरेभ्य: उचिततमम् उत्तरं चित्वा लिखत। अश्वानां लक्षणं वेगो गजानां लक्षणं मद:। चातुर्यं लक्षणं स्त्रीणाम् उद्योगों लक्षणं न¸णाम् ।। नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावक:। न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुत:।। क्षमा शस्त्रं करे यस्य दुर्जन: किम् करिष्यति। अतृणे पतितो वह्नि स्वयमेवोपशाम्यति।। अजीर्णे भेषजं वारि जीर्णे वारि बलप्रदम्। भोजने चामृतं वारि भोजनान्ते विषप्रदम्।। ददाति प्रतिग्रहिति गुह्यमाख्याति पृच्छति। भुङ्क्ते भोजयते चैव षड्विधं प्रीतिलक्षणम् ।। विकृतिं नैव गच्छन्ति संगदोषेण साधव:। आवेष्टितं महासर्पै: चन्दनं न विषायते।। तृतीये श्लोके `अग्नि:' इति पदस्य स्थाने क: शब्द: प्रयुक्त?
  • A. वस्त्रम्
  • B. शिरस्त्राणम्
  • C. वह्नि:
  • D. काष्ठम्
Correct Answer: Option C - तीसरे श्लोक में ‘अग्नि’ पद के स्थान पर ‘वह्नि:’ पद का प्रयोग होगा क्योंकि ‘अग्नि’ तथा ‘वह्नि:’ एक दूसरे के पर्याय पद हैं। अन्य विकल्पों का अर्थ होगा– शब्द अर्थ वस्त्रम् = कपड़ा शिरस्त्राणाम् = गर्दन का ऊपरी हिस्सा या सिर की रक्षा करना काष्ठम् = लकड़ी का टुकड़ा
C. तीसरे श्लोक में ‘अग्नि’ पद के स्थान पर ‘वह्नि:’ पद का प्रयोग होगा क्योंकि ‘अग्नि’ तथा ‘वह्नि:’ एक दूसरे के पर्याय पद हैं। अन्य विकल्पों का अर्थ होगा– शब्द अर्थ वस्त्रम् = कपड़ा शिरस्त्राणाम् = गर्दन का ऊपरी हिस्सा या सिर की रक्षा करना काष्ठम् = लकड़ी का टुकड़ा

Explanations:

तीसरे श्लोक में ‘अग्नि’ पद के स्थान पर ‘वह्नि:’ पद का प्रयोग होगा क्योंकि ‘अग्नि’ तथा ‘वह्नि:’ एक दूसरे के पर्याय पद हैं। अन्य विकल्पों का अर्थ होगा– शब्द अर्थ वस्त्रम् = कपड़ा शिरस्त्राणाम् = गर्दन का ऊपरी हिस्सा या सिर की रक्षा करना काष्ठम् = लकड़ी का टुकड़ा