Explanations:
सर्वभूतेषु आत्मवत् व्यवहारं कर्तुं संस्कृतभाषा शिक्षयति चेत् तेन समानता प्राप्यते। उपर्युक्त गद्यांश में बताया गया है कि- सभी प्राणियों से आत्मवत् व्यवहार करना चाहिए यही हमारी संस्कृत भाषा बताती है क्योंकि संस्कृत भाषा का मूल मंत्र है- ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ पृथ्वी पर रहने वाले सभी लोग अपने परिवार के ही समान होते हैं। इसलिए उनसे आत्मवत् व्यवहार करना चाहिए।