Correct Answer:
Option A - सुभाषितं हारि विशत्यधो, गलान्न दुर्जनस्यार्करिपोरिवामृतम्। यह सूक्ति कादम्बरी से उद्धृत है। महाकवि बाणभट्ट द्वारा विरचित ‘कादम्बरी कथा’ दो खण्डों में विभक्त है-पूर्वार्द्ध और उत्तरार्द्ध। कादम्बरी में नमस्कारात्मक मङ्गलाचरण का प्रयोग है।
A. सुभाषितं हारि विशत्यधो, गलान्न दुर्जनस्यार्करिपोरिवामृतम्। यह सूक्ति कादम्बरी से उद्धृत है। महाकवि बाणभट्ट द्वारा विरचित ‘कादम्बरी कथा’ दो खण्डों में विभक्त है-पूर्वार्द्ध और उत्तरार्द्ध। कादम्बरी में नमस्कारात्मक मङ्गलाचरण का प्रयोग है।