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Q: ``स चिन्तयत्येव भियस्त्वदेष्यतीरहो दुरन्ता बलवद्विरोधिता।।'' यह किसके विषय में कहा गया है?
  • A. युधिष्ठिर के
  • B. वनेचर के
  • C. दुर्योधन के
  • D. दु:शासन के
Correct Answer: Option C - ``स चिन्तयत्येव भियस्त्वदेष्यतीरहो दुरन्ता बलवदिवरोधिता।।'' वनेचर दुर्योधन की मन: स्थिति का वर्णन करता है कि समुद्रपर्यन्त शासन करने वाला वह दुर्योधन पाण्डवों की ओर से आने वाली विपत्तियों को रात दिन सोचता रहता है कि न जाने कब बलवान तथा नीतिज्ञ पाण्डव अपने राज्य को मुझसे छीन लेंगे। प्रबल शत्रु के साथ विरोधभाव दु:खद परिणाम वाला होता है।
C. ``स चिन्तयत्येव भियस्त्वदेष्यतीरहो दुरन्ता बलवदिवरोधिता।।'' वनेचर दुर्योधन की मन: स्थिति का वर्णन करता है कि समुद्रपर्यन्त शासन करने वाला वह दुर्योधन पाण्डवों की ओर से आने वाली विपत्तियों को रात दिन सोचता रहता है कि न जाने कब बलवान तथा नीतिज्ञ पाण्डव अपने राज्य को मुझसे छीन लेंगे। प्रबल शत्रु के साथ विरोधभाव दु:खद परिणाम वाला होता है।

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``स चिन्तयत्येव भियस्त्वदेष्यतीरहो दुरन्ता बलवदिवरोधिता।।'' वनेचर दुर्योधन की मन: स्थिति का वर्णन करता है कि समुद्रपर्यन्त शासन करने वाला वह दुर्योधन पाण्डवों की ओर से आने वाली विपत्तियों को रात दिन सोचता रहता है कि न जाने कब बलवान तथा नीतिज्ञ पाण्डव अपने राज्य को मुझसे छीन लेंगे। प्रबल शत्रु के साथ विरोधभाव दु:खद परिणाम वाला होता है।