Correct Answer:
Option C - गरजने वाली चालीसा दक्षिणी गोलार्द्ध की पछुआ पवनें है। ये पवन उपोष्ण उच्च वायुदाब (30º–35º) से उपध्रुवीय निम्न वायुदाब (60–65 अक्षांश) के बीच दोनों गोलार्द्धों में चलने वाली पवन है। इनकी दिशा उत्तरी गोलार्द्ध में द.प. से उ.पू. तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में उ.प. से द.पू. की ओर होती है। दक्षिणी गोलार्द्ध में स्थल की कमी के कारण इनकी गति इतनी तेज हो जाती है कि हवाएं तूफानी हो जाती हैं। पछुआ हवाओं के साथ प्रचण्ड झंझा चला करते हैं। इनकी प्रचण्डता के कारण ही इन्हें 40º दक्षिणी अक्षांशों में गरजता चालीसा, 50º द. अक्षांश के पास भयंकर पचासा तथा 60º द. अक्षांश के पास चीखता साठा आदि नामों से पुकारते हैं।
C. गरजने वाली चालीसा दक्षिणी गोलार्द्ध की पछुआ पवनें है। ये पवन उपोष्ण उच्च वायुदाब (30º–35º) से उपध्रुवीय निम्न वायुदाब (60–65 अक्षांश) के बीच दोनों गोलार्द्धों में चलने वाली पवन है। इनकी दिशा उत्तरी गोलार्द्ध में द.प. से उ.पू. तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में उ.प. से द.पू. की ओर होती है। दक्षिणी गोलार्द्ध में स्थल की कमी के कारण इनकी गति इतनी तेज हो जाती है कि हवाएं तूफानी हो जाती हैं। पछुआ हवाओं के साथ प्रचण्ड झंझा चला करते हैं। इनकी प्रचण्डता के कारण ही इन्हें 40º दक्षिणी अक्षांशों में गरजता चालीसा, 50º द. अक्षांश के पास भयंकर पचासा तथा 60º द. अक्षांश के पास चीखता साठा आदि नामों से पुकारते हैं।