Correct Answer:
Option B - रवीन्द्रनाथ के अधिकतर चित्र ऐसे दिखायी पड़ते हैं जैसे वे क्षणिक सर्जन प्रेरणा द्वारा बिना पुर्नविचार के बनाये गये हों उनमें परिवर्तन या उद्देश्य पूर्ण प्रतिपादन के प्रयत्न नहीं है। चित्रण को आरम्भ करते ही वे बिना विश्राम या चिन्तन के तद्रूप होकर उसको शीघ्रता से पूर्ण करते। उन्होंने सर्व प्रकार के रंगों पेस्टल, ड्राय पाइन्ट व एिंचग का प्रयोग किया। किन्तु वे द्रव मिश्रित रंगों को अधिक पसन्द करते और सुलभता से प्राप्त स्याही का भी प्रचुर मात्रा में उपयोग करते।
B. रवीन्द्रनाथ के अधिकतर चित्र ऐसे दिखायी पड़ते हैं जैसे वे क्षणिक सर्जन प्रेरणा द्वारा बिना पुर्नविचार के बनाये गये हों उनमें परिवर्तन या उद्देश्य पूर्ण प्रतिपादन के प्रयत्न नहीं है। चित्रण को आरम्भ करते ही वे बिना विश्राम या चिन्तन के तद्रूप होकर उसको शीघ्रता से पूर्ण करते। उन्होंने सर्व प्रकार के रंगों पेस्टल, ड्राय पाइन्ट व एिंचग का प्रयोग किया। किन्तु वे द्रव मिश्रित रंगों को अधिक पसन्द करते और सुलभता से प्राप्त स्याही का भी प्रचुर मात्रा में उपयोग करते।