Correct Answer:
Option B - रावणवध-महाकाव्यस्य रचयिता ‘भट्टि स्वामी’ अस्ति। महाकवि भट्टि-विरचित एकमात्र महाकाव्य उन्हीं के नाम पर ‘‘भट्टिकाव्य’’ के नाम से संस्कृत-जगत् में प्रसिद्ध है। इसका अपर नाम ‘‘रावण-वध’’ भी है। इसमें कुल 22 सर्ग एवं 1629 श्लोक हैं। इसका मूलस्रोत ‘‘वाल्मीकि-रामायण’’ है।
कुमारदास – जानकीहरण-महाकाव्यम्।
आर्यशूर – जातकमाला
अत: प्रश्नानुसार समुचित विकल्प (b) सही है।
B. रावणवध-महाकाव्यस्य रचयिता ‘भट्टि स्वामी’ अस्ति। महाकवि भट्टि-विरचित एकमात्र महाकाव्य उन्हीं के नाम पर ‘‘भट्टिकाव्य’’ के नाम से संस्कृत-जगत् में प्रसिद्ध है। इसका अपर नाम ‘‘रावण-वध’’ भी है। इसमें कुल 22 सर्ग एवं 1629 श्लोक हैं। इसका मूलस्रोत ‘‘वाल्मीकि-रामायण’’ है।
कुमारदास – जानकीहरण-महाकाव्यम्।
आर्यशूर – जातकमाला
अत: प्रश्नानुसार समुचित विकल्प (b) सही है।