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Q: ‘‘रावण अशुद्ध होकर भी यदि कर सका त्रस्त, तो निश्चय तुम हो सिद्ध करोगे उसे ध्वस्त।’’ ‘राम की शक्तिपूजा’ कविता में यह कथन किसका है?
  • A. लक्ष्मण
  • B. जाम्बवान
  • C. सुग्रीव
  • D. विभीषण
Correct Answer: Option B - ‘‘रावण अशुद्ध होकर भी यदि कर सका त्रस्त, तो निश्चय तुम हो सिद्ध करोगे उसे ध्वस्त।’’ ‘राम की शक्तिपूजा’ कविता में यह कथन जाम्बवान का है। ‘राम की शक्तिपूजा’ कविता के लेखक सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ जी है। निराला की रचनाएँ हैं– अनामिका, परिमल, गीतिका, तुलसीदास, कुकुरमुत्ता, अणिमा, बेला, नये पत्ते, अर्चना, आराधना, गीतगुंज, सांध्यकाकली।
B. ‘‘रावण अशुद्ध होकर भी यदि कर सका त्रस्त, तो निश्चय तुम हो सिद्ध करोगे उसे ध्वस्त।’’ ‘राम की शक्तिपूजा’ कविता में यह कथन जाम्बवान का है। ‘राम की शक्तिपूजा’ कविता के लेखक सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ जी है। निराला की रचनाएँ हैं– अनामिका, परिमल, गीतिका, तुलसीदास, कुकुरमुत्ता, अणिमा, बेला, नये पत्ते, अर्चना, आराधना, गीतगुंज, सांध्यकाकली।

Explanations:

‘‘रावण अशुद्ध होकर भी यदि कर सका त्रस्त, तो निश्चय तुम हो सिद्ध करोगे उसे ध्वस्त।’’ ‘राम की शक्तिपूजा’ कविता में यह कथन जाम्बवान का है। ‘राम की शक्तिपूजा’ कविता के लेखक सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ जी है। निराला की रचनाएँ हैं– अनामिका, परिमल, गीतिका, तुलसीदास, कुकुरमुत्ता, अणिमा, बेला, नये पत्ते, अर्चना, आराधना, गीतगुंज, सांध्यकाकली।