Correct Answer:
Option B - रससूत्र ‘‘विभावानुभावव्यभिचारिसंयोगाद्रसनिष्पत्ति:’’ भरतमुक्ति कृत नाट्यशास्त्र में आया है। उस सूत्र में भरतमुनि ने बताया है कि स्थायी भाव, विभाव, अनुभाव व संचारी भाव के संयोग से रस की निष्पत्ति होती है। ‘साहित्य दर्पण’ में आचार्य विश्वनाथ ने ‘वाक्यं रसात्मकं काव्यम्’ सूत्र दिया है। ‘रसगंगाधर’ में पंडित राज जगन्नाथ ने – ‘रमणीयार्थ प्रतिपादक शब्द: काव्यम्’ सूत्र दिया। ‘दशरूपक’ धनंजयं कृत नाटक के दशरूपों का लक्षण एवं विशेषता प्रकट करने वाला ग्रंथ हैै।
B. रससूत्र ‘‘विभावानुभावव्यभिचारिसंयोगाद्रसनिष्पत्ति:’’ भरतमुक्ति कृत नाट्यशास्त्र में आया है। उस सूत्र में भरतमुनि ने बताया है कि स्थायी भाव, विभाव, अनुभाव व संचारी भाव के संयोग से रस की निष्पत्ति होती है। ‘साहित्य दर्पण’ में आचार्य विश्वनाथ ने ‘वाक्यं रसात्मकं काव्यम्’ सूत्र दिया है। ‘रसगंगाधर’ में पंडित राज जगन्नाथ ने – ‘रमणीयार्थ प्रतिपादक शब्द: काव्यम्’ सूत्र दिया। ‘दशरूपक’ धनंजयं कृत नाटक के दशरूपों का लक्षण एवं विशेषता प्रकट करने वाला ग्रंथ हैै।