Correct Answer:
Option C - ‘रसमंजरी’ के रचनाकार पुष्टिमार्गीय अष्टछाप के कवि नन्ददास जी हैं। नन्ददास को जडि़या कवि भी कहा जाता है। नन्ददास ने कई रचनाएँ की जिनमें कुछ इस प्रकार हैं- रस मंजरी, अनेकार्थमंजरी, भागवत्-दशम स्कन्ध, श्याम सगाई, गोवद्र्धन लीला, सुदामा चरित, विरह मंजरी, रूप मंजरी, रुक्मिणी मंगल, रासपंचाध्यायी, भँवरगीत, सिद्धान्त पंचाध्यायी।
C. ‘रसमंजरी’ के रचनाकार पुष्टिमार्गीय अष्टछाप के कवि नन्ददास जी हैं। नन्ददास को जडि़या कवि भी कहा जाता है। नन्ददास ने कई रचनाएँ की जिनमें कुछ इस प्रकार हैं- रस मंजरी, अनेकार्थमंजरी, भागवत्-दशम स्कन्ध, श्याम सगाई, गोवद्र्धन लीला, सुदामा चरित, विरह मंजरी, रूप मंजरी, रुक्मिणी मंगल, रासपंचाध्यायी, भँवरगीत, सिद्धान्त पंचाध्यायी।