Correct Answer:
Option C - रमणीय: खल्ववधिर्विधिना विसंवादित: इयम् सानुमत्या: उक्ति:।
अर्थात् कवि कुलगुरु कालिदास द्वारा विरचित ‘अभिज्ञानशाकुन्तलम्’ नाटक के षष्ठ अङ्ग से सानुमती द्वारा कथित है इसका तात्पर्य यह है- यह बहुत सुन्दर अवधि थी, (परन्तु) भाग्य ने इसे बिगाड़ दिया। यह मेनका अप्सरा की सखी थी, जिससे यह शकुन्तला की मर्मव्यथा को पहचानती थी। अत: प्रश्नानुसार विकल्प (c) सही है शेष अन्य विकल्प इस प्रकार हैं- मधुरिका परभृतिका ये दोनों राजा (दुष्यन्त) की सेविकाएँ हैं, और प्रियंवदा शकुन्तला की सखी है प्रियंवदा का तात्पर्य है प्रिय बोलने वाली।
C. रमणीय: खल्ववधिर्विधिना विसंवादित: इयम् सानुमत्या: उक्ति:।
अर्थात् कवि कुलगुरु कालिदास द्वारा विरचित ‘अभिज्ञानशाकुन्तलम्’ नाटक के षष्ठ अङ्ग से सानुमती द्वारा कथित है इसका तात्पर्य यह है- यह बहुत सुन्दर अवधि थी, (परन्तु) भाग्य ने इसे बिगाड़ दिया। यह मेनका अप्सरा की सखी थी, जिससे यह शकुन्तला की मर्मव्यथा को पहचानती थी। अत: प्रश्नानुसार विकल्प (c) सही है शेष अन्य विकल्प इस प्रकार हैं- मधुरिका परभृतिका ये दोनों राजा (दुष्यन्त) की सेविकाएँ हैं, और प्रियंवदा शकुन्तला की सखी है प्रियंवदा का तात्पर्य है प्रिय बोलने वाली।