Correct Answer:
Option B - रामभक्ति शाखा में रसिकोपासना का समावेश अग्रदास ने किया। इन्होंने ‘रसिक सम्प्रदाय’ की स्थापना की। रसिक सम्प्रदाय में अग्रदास को ‘अग्रअली’ भी कहा जाता है। अग्रदास कृत ‘ध्यान मंजरी’ रसिकोपासना का सिद्धान्त ग्रंथ है। रसिक सम्प्रदाय के अन्य प्रमुख कवि है- बालकृष्ण ‘बाल अली’, रसमाला, रामशरण ‘प्रेमकली’, प्रयागदास, रामगुलाम द्विवेदी, रीवाँ नरेश महाराज रघुराज सिंह। ध्यातव्य है कि इस सम्प्रदाय के कवि स्वयं को सीता जी की ‘सखी’ के रूप में प्रस्तुत कर राम का विशेष स्नेह प्राप्त करने हेतु पदों की रचना करते थे।
B. रामभक्ति शाखा में रसिकोपासना का समावेश अग्रदास ने किया। इन्होंने ‘रसिक सम्प्रदाय’ की स्थापना की। रसिक सम्प्रदाय में अग्रदास को ‘अग्रअली’ भी कहा जाता है। अग्रदास कृत ‘ध्यान मंजरी’ रसिकोपासना का सिद्धान्त ग्रंथ है। रसिक सम्प्रदाय के अन्य प्रमुख कवि है- बालकृष्ण ‘बाल अली’, रसमाला, रामशरण ‘प्रेमकली’, प्रयागदास, रामगुलाम द्विवेदी, रीवाँ नरेश महाराज रघुराज सिंह। ध्यातव्य है कि इस सम्प्रदाय के कवि स्वयं को सीता जी की ‘सखी’ के रूप में प्रस्तुत कर राम का विशेष स्नेह प्राप्त करने हेतु पदों की रचना करते थे।