Explanations:
राघव कनेरिया मूर्तिशिल्पों को मिट्टी, लकड़ी, धातु, तथा मटके के टुकड़ों के माध्यम से संयोजित करते हैं। इनमें आध्यात्मिक व ऐन्द्रिक लयात्मकता बहुत खूबसूरती के साथ उभर कर आती है। आपके सृजन में संवेगों की सघनता, अदभुत दक्षता तथा गहन अवलोकन है। दृश्य चित्रों के रेखांकन की स्वप्निक यथार्थ को त्रिआयामी मूर्तिशिल्पीय दक्षता को उजागर करते हैं