Correct Answer:
Option B - ‘रघुकुल रीति सदा चलि आई।
प्राण जाई पर बचन न जाई।’
इन पंक्तियों में चौपाई छन्द का प्रयोग हुआ है। चौपाई सममात्रिक छन्द है। इसके प्रत्येक चरण में 16-16 मात्राएँ होती है। अन्त में दो गुरु वर्ण होते हैं तथा अन्त में जगण और तगण का आना वर्जित है।
B. ‘रघुकुल रीति सदा चलि आई।
प्राण जाई पर बचन न जाई।’
इन पंक्तियों में चौपाई छन्द का प्रयोग हुआ है। चौपाई सममात्रिक छन्द है। इसके प्रत्येक चरण में 16-16 मात्राएँ होती है। अन्त में दो गुरु वर्ण होते हैं तथा अन्त में जगण और तगण का आना वर्जित है।