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Q: रुच्-धातोर्योगे का विभक्तिर्भवति?
  • A. द्वितीया
  • B. तृतीया
  • C. सप्तमी
  • D. चतुर्थी
Correct Answer: Option D - रुच् – धातोर्योगे ‘चतुर्थी’ विभक्ति: भवति। रुच्यार्थानां प्रीयमाण: अर्थात् रुच् तथा इसके समान अर्थ वाली धातुओं के योग में प्रीयमाण की सम्प्रदान संज्ञा होती है तथा उसमें चतुर्थी विभक्ति होती है जैसे- हरये रोचते भक्ति : (हरी को भक्ति अच्छी लगती है ।)
D. रुच् – धातोर्योगे ‘चतुर्थी’ विभक्ति: भवति। रुच्यार्थानां प्रीयमाण: अर्थात् रुच् तथा इसके समान अर्थ वाली धातुओं के योग में प्रीयमाण की सम्प्रदान संज्ञा होती है तथा उसमें चतुर्थी विभक्ति होती है जैसे- हरये रोचते भक्ति : (हरी को भक्ति अच्छी लगती है ।)

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रुच् – धातोर्योगे ‘चतुर्थी’ विभक्ति: भवति। रुच्यार्थानां प्रीयमाण: अर्थात् रुच् तथा इसके समान अर्थ वाली धातुओं के योग में प्रीयमाण की सम्प्रदान संज्ञा होती है तथा उसमें चतुर्थी विभक्ति होती है जैसे- हरये रोचते भक्ति : (हरी को भक्ति अच्छी लगती है ।)