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Q: Physical labor done in any direction towards the production for for oneself or societal cause is considered as ––––––. स्वयं के लिए या सामाजिक कारण से उत्पादन की दिशा में किसी भी दिशा में किया गया शारीरिक श्रम________ माना जाता है।
  • A. Work/कार्य
  • B. Leisure/फुर्सत
  • C. Restrict/रोकना
  • D. Rest/विश्राम
Correct Answer: Option A - स्वयं के लिए या सामाजिक कारण से उत्पादन की दिशा में किसी भी दिशा में किया गया शारीरिक श्रम कार्य माना जाता है। कार्य मूलत: ऐसी गतिविधि है, जिसे सभी मनुष्य करते हैं और जिसके द्वारा प्रत्येक, मनुष्य संसार में एक स्थान पाता है, नए संबंध बनाता है, अपनी विशिष्ट प्रतिभाओं और कौशलों का उपयोग करता है और सबसे ऊपर अपनी पहचान और समाज के प्रति लगाव की भावना को विकसित करना सीखता है और उसमें वृद्धि करता है। कार्य का वर्णन आवश्यक गतिविधियों के रूप में किया जा सकता है जो किसी उद्देश्य या आवश्यकता के लिए की जाती है। किसी ने कहा है-‘‘ कार्य वह तेल है जो समाज रूपी मशीन के लिए स्नेहक का काम करता है’’ केवल मनुष्य ही नहीं, प्रकृति के सभी जीव और तत्व निरंतर कार्यरत् हैं और जीवन चक्र में अपना योगदान देते रहते है।
A. स्वयं के लिए या सामाजिक कारण से उत्पादन की दिशा में किसी भी दिशा में किया गया शारीरिक श्रम कार्य माना जाता है। कार्य मूलत: ऐसी गतिविधि है, जिसे सभी मनुष्य करते हैं और जिसके द्वारा प्रत्येक, मनुष्य संसार में एक स्थान पाता है, नए संबंध बनाता है, अपनी विशिष्ट प्रतिभाओं और कौशलों का उपयोग करता है और सबसे ऊपर अपनी पहचान और समाज के प्रति लगाव की भावना को विकसित करना सीखता है और उसमें वृद्धि करता है। कार्य का वर्णन आवश्यक गतिविधियों के रूप में किया जा सकता है जो किसी उद्देश्य या आवश्यकता के लिए की जाती है। किसी ने कहा है-‘‘ कार्य वह तेल है जो समाज रूपी मशीन के लिए स्नेहक का काम करता है’’ केवल मनुष्य ही नहीं, प्रकृति के सभी जीव और तत्व निरंतर कार्यरत् हैं और जीवन चक्र में अपना योगदान देते रहते है।

Explanations:

स्वयं के लिए या सामाजिक कारण से उत्पादन की दिशा में किसी भी दिशा में किया गया शारीरिक श्रम कार्य माना जाता है। कार्य मूलत: ऐसी गतिविधि है, जिसे सभी मनुष्य करते हैं और जिसके द्वारा प्रत्येक, मनुष्य संसार में एक स्थान पाता है, नए संबंध बनाता है, अपनी विशिष्ट प्रतिभाओं और कौशलों का उपयोग करता है और सबसे ऊपर अपनी पहचान और समाज के प्रति लगाव की भावना को विकसित करना सीखता है और उसमें वृद्धि करता है। कार्य का वर्णन आवश्यक गतिविधियों के रूप में किया जा सकता है जो किसी उद्देश्य या आवश्यकता के लिए की जाती है। किसी ने कहा है-‘‘ कार्य वह तेल है जो समाज रूपी मशीन के लिए स्नेहक का काम करता है’’ केवल मनुष्य ही नहीं, प्रकृति के सभी जीव और तत्व निरंतर कार्यरत् हैं और जीवन चक्र में अपना योगदान देते रहते है।