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Q: पियाजे के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन सी अवस्था में बच्चा अमूर्त संकल्पनाओं के विषय में तार्किक चिंतन करना आरंभ करता है?
  • A. औपचारिक-संक्रियात्मक अवस्था (12 वर्ष एवं ऊपर)
  • B. संवेदी –प्रेरक अवस्था (जन्म -02 वर्ष)
  • C. पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (02-07 वर्ष)
  • D. मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था (07-11 वर्ष)
Correct Answer: Option A - औपचारिक-संक्रियात्मक अवस्था (12 वर्ष के ऊपर) औपचारिक संक्रिया की अवस्था संज्ञानात्मक विकास की अन्तिम अवस्था है यह 11 के बाद होता है। मूल रूप से यह अवस्था तार्किक चिन्तन की अवस्था है। अर्थात् इस अवस्था का बालक अन्य वस्तुओं के अतिरिक्त स्वयं के विचारों के सम्बन्ध में विचार करने में समर्थ हो जाता है। बालक उद्दीपकों की अनुपस्थिति में भी उनकी विशेषताओं, उपयोगिताओं एवं अन्य बिन्दुओं के बारे में सोच सकता है। बालक के विचार परिपक्व हो जाते हैं।
A. औपचारिक-संक्रियात्मक अवस्था (12 वर्ष के ऊपर) औपचारिक संक्रिया की अवस्था संज्ञानात्मक विकास की अन्तिम अवस्था है यह 11 के बाद होता है। मूल रूप से यह अवस्था तार्किक चिन्तन की अवस्था है। अर्थात् इस अवस्था का बालक अन्य वस्तुओं के अतिरिक्त स्वयं के विचारों के सम्बन्ध में विचार करने में समर्थ हो जाता है। बालक उद्दीपकों की अनुपस्थिति में भी उनकी विशेषताओं, उपयोगिताओं एवं अन्य बिन्दुओं के बारे में सोच सकता है। बालक के विचार परिपक्व हो जाते हैं।

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औपचारिक-संक्रियात्मक अवस्था (12 वर्ष के ऊपर) औपचारिक संक्रिया की अवस्था संज्ञानात्मक विकास की अन्तिम अवस्था है यह 11 के बाद होता है। मूल रूप से यह अवस्था तार्किक चिन्तन की अवस्था है। अर्थात् इस अवस्था का बालक अन्य वस्तुओं के अतिरिक्त स्वयं के विचारों के सम्बन्ध में विचार करने में समर्थ हो जाता है। बालक उद्दीपकों की अनुपस्थिति में भी उनकी विशेषताओं, उपयोगिताओं एवं अन्य बिन्दुओं के बारे में सोच सकता है। बालक के विचार परिपक्व हो जाते हैं।