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Q: पाठ्यपुस्तक का महत्व है
  • A. छात्रों को बाहरी दुनिया से परिचित कराने में
  • B. बाहरी दुनिया का ज्ञान प्रदान करने
  • C. पढ़ने, लिखने और बोलने के कौशल में सुधार हेतु
  • D. उपर्युक्त सभी
Correct Answer: Option D - हैरोलिकर के अनुसार, ‘‘पाठ्यपुस्तक ज्ञान, अनुभवों, भावनाओं, विचारों तथा प्रवृत्तियों व मूल्यों के संचय का साधन है’’ पाठ्यपुस्तकों का निम्नलिखित महत्व है - * पाठ्यपुस्तक छात्रों को बाहरी दुनिया से परिचित कराते है। * पाठ्यपुस्तक दुनिया का ज्ञान प्रदान करते है। * पाठ्यपुस्तक लिखने और बोलने के कौशल में सुधार हेतु प्रयोग में लाये जाते है। * पाठ्यपुस्तकें शिक्षण के प्रकरणों की सीमा को निर्धारित करती है।
D. हैरोलिकर के अनुसार, ‘‘पाठ्यपुस्तक ज्ञान, अनुभवों, भावनाओं, विचारों तथा प्रवृत्तियों व मूल्यों के संचय का साधन है’’ पाठ्यपुस्तकों का निम्नलिखित महत्व है - * पाठ्यपुस्तक छात्रों को बाहरी दुनिया से परिचित कराते है। * पाठ्यपुस्तक दुनिया का ज्ञान प्रदान करते है। * पाठ्यपुस्तक लिखने और बोलने के कौशल में सुधार हेतु प्रयोग में लाये जाते है। * पाठ्यपुस्तकें शिक्षण के प्रकरणों की सीमा को निर्धारित करती है।

Explanations:

हैरोलिकर के अनुसार, ‘‘पाठ्यपुस्तक ज्ञान, अनुभवों, भावनाओं, विचारों तथा प्रवृत्तियों व मूल्यों के संचय का साधन है’’ पाठ्यपुस्तकों का निम्नलिखित महत्व है - * पाठ्यपुस्तक छात्रों को बाहरी दुनिया से परिचित कराते है। * पाठ्यपुस्तक दुनिया का ज्ञान प्रदान करते है। * पाठ्यपुस्तक लिखने और बोलने के कौशल में सुधार हेतु प्रयोग में लाये जाते है। * पाठ्यपुस्तकें शिक्षण के प्रकरणों की सीमा को निर्धारित करती है।