Correct Answer:
Option B - पृथ्वी पर दिन रात बनने की समझ हेतु घूर्णन की अवधारणा आवश्यक समझी जाती है। पृथ्वी का घूर्णन 24 घंटे में पूर्ण होता है, जिसे पृथ्वी की दैनिक गति भी कहते हैं। यह दैनिक गति दिन व रात के घटित होने के लिए जिम्मेदार होती है। पृथ्वी को प्रकाश व ऊष्मा की प्राप्ति सूर्य से होती है। अत: घूर्णन करती हुयी पृथ्वी के प्रत्येक भाग में एक निश्चित अवधि के लिए सूर्य का प्रकाश पहुंचता है।
पृथ्वी की गति दो प्रकार की है (1) घूर्णन (2) परिक्रमण
घूर्णन – पृथ्वी का अपने अक्ष पर घूमना घूर्णन कहलाता है।
परिक्रमण – सूर्य के चारों ओर एक स्थिर कक्षा में पृथ्वी की गति को परिक्रमण कहते हैं।
B. पृथ्वी पर दिन रात बनने की समझ हेतु घूर्णन की अवधारणा आवश्यक समझी जाती है। पृथ्वी का घूर्णन 24 घंटे में पूर्ण होता है, जिसे पृथ्वी की दैनिक गति भी कहते हैं। यह दैनिक गति दिन व रात के घटित होने के लिए जिम्मेदार होती है। पृथ्वी को प्रकाश व ऊष्मा की प्राप्ति सूर्य से होती है। अत: घूर्णन करती हुयी पृथ्वी के प्रत्येक भाग में एक निश्चित अवधि के लिए सूर्य का प्रकाश पहुंचता है।
पृथ्वी की गति दो प्रकार की है (1) घूर्णन (2) परिक्रमण
घूर्णन – पृथ्वी का अपने अक्ष पर घूमना घूर्णन कहलाता है।
परिक्रमण – सूर्य के चारों ओर एक स्थिर कक्षा में पृथ्वी की गति को परिक्रमण कहते हैं।