Correct Answer:
Option C - पद्मगुप्तपरिमलेन विरचितं महाकाव्यं ‘नवसाहसाङ्गचरितम्’ अस्ति। अर्थात् पद्मगुप्तपरिमल द्वारा विरचित महाकाव्य ‘नवसाहसाङ्गचरितम्’ है। पद्मगुप्त राजा मुञ्ज के आश्रित कवि थे। इनके पिता का नाम मृगाङ्गगुप्त था। इन्हें परिमल कालिदास भी कहा जाता था। विद्वानों की दृष्टि में यह प्रथम ऐतिहासिक महाकाव्य है। इसमें 18 सर्ग हैं।
विक्रमाङ्गदेवचरितम् – बिल्हण रचित 18 सर्गों का महाकाव्य है। इसमें चालुक्य-नरेश विक्रमादित्य (षष्ठी) की प्रशंसा का वर्णन है।
कुमारपालचरितम् – हेमचन्द्र द्वारा रचित ग्रन्थ है। इसमें अनहिलवाड़ के चालुक्य-नरेश कुमारपाल का वर्णन है।
C. पद्मगुप्तपरिमलेन विरचितं महाकाव्यं ‘नवसाहसाङ्गचरितम्’ अस्ति। अर्थात् पद्मगुप्तपरिमल द्वारा विरचित महाकाव्य ‘नवसाहसाङ्गचरितम्’ है। पद्मगुप्त राजा मुञ्ज के आश्रित कवि थे। इनके पिता का नाम मृगाङ्गगुप्त था। इन्हें परिमल कालिदास भी कहा जाता था। विद्वानों की दृष्टि में यह प्रथम ऐतिहासिक महाकाव्य है। इसमें 18 सर्ग हैं।
विक्रमाङ्गदेवचरितम् – बिल्हण रचित 18 सर्गों का महाकाव्य है। इसमें चालुक्य-नरेश विक्रमादित्य (षष्ठी) की प्रशंसा का वर्णन है।
कुमारपालचरितम् – हेमचन्द्र द्वारा रचित ग्रन्थ है। इसमें अनहिलवाड़ के चालुक्य-नरेश कुमारपाल का वर्णन है।