Correct Answer:
Option C - प्रायद्वीपीय पठार प्राचीन गोंडवाना भूमि का भाग है, जो त्रिभुजाकार आकृति में फैला हुआ है। इसकी औसत ऊँचाई 600 से 900 मीटर के मध्य है। प्रायद्वीपीय पठार की ऊँचाई सामान्यत: पश्चिम से पूर्व की ओर कम होती जाती है जो कि महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी की दिशा से स्पष्ट है। प्रायद्वीपीय पठार चारों तरफ से पहाड़ी श्रृंखलाओं से घिरा है। उत्तर-पश्चिम में अरावली का विस्तार, पूर्व में राजमहल पहाडि़याँ, पश्चिम में गिर पहाडि़याँ तथा दक्षिण में इलायची पहाडि़याँ (प्रायद्वीपीय पठार के बाहरी हिस्से का निर्माण करती है) स्थित है। अत: कथन (i) और (iii) सही नही है। जबकि कथन (ii) सही है। इसलिए विकल्प (c) सही है।
C. प्रायद्वीपीय पठार प्राचीन गोंडवाना भूमि का भाग है, जो त्रिभुजाकार आकृति में फैला हुआ है। इसकी औसत ऊँचाई 600 से 900 मीटर के मध्य है। प्रायद्वीपीय पठार की ऊँचाई सामान्यत: पश्चिम से पूर्व की ओर कम होती जाती है जो कि महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी की दिशा से स्पष्ट है। प्रायद्वीपीय पठार चारों तरफ से पहाड़ी श्रृंखलाओं से घिरा है। उत्तर-पश्चिम में अरावली का विस्तार, पूर्व में राजमहल पहाडि़याँ, पश्चिम में गिर पहाडि़याँ तथा दक्षिण में इलायची पहाडि़याँ (प्रायद्वीपीय पठार के बाहरी हिस्से का निर्माण करती है) स्थित है। अत: कथन (i) और (iii) सही नही है। जबकि कथन (ii) सही है। इसलिए विकल्प (c) सही है।