Correct Answer:
Option C - प्रायश्चित कर्म- चान्द्रायण व्रत है। अर्थात् - प्रायश्चित्तानि पापक्षयसाधनानि चान्द्रायणादीन । पापों का क्षय करने के लिए साधन बनने वाले चान्द्रायण आदि व्रत प्रायश्चित्त कर्म है।
सन्ध्यावन्दनादि -नित्यान्यकरणे प्रत्यवाय साधनानि सन्ध्यावन्दनादीनि।
जातेष्टि आदि - नैमित्तिकानि पुत्रजन्माद्यनुबन्धीनि जातेष्ट्यादीनि।
शाण्डिल्य आदि- उपासनानि सगुणब्रह्म विषयमानसव्यापाररूपाणि शाण्डिल्य विद्यादीनि।
C. प्रायश्चित कर्म- चान्द्रायण व्रत है। अर्थात् - प्रायश्चित्तानि पापक्षयसाधनानि चान्द्रायणादीन । पापों का क्षय करने के लिए साधन बनने वाले चान्द्रायण आदि व्रत प्रायश्चित्त कर्म है।
सन्ध्यावन्दनादि -नित्यान्यकरणे प्रत्यवाय साधनानि सन्ध्यावन्दनादीनि।
जातेष्टि आदि - नैमित्तिकानि पुत्रजन्माद्यनुबन्धीनि जातेष्ट्यादीनि।
शाण्डिल्य आदि- उपासनानि सगुणब्रह्म विषयमानसव्यापाररूपाणि शाण्डिल्य विद्यादीनि।