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Q: ‘‘प्रयोगवाद हिन्दी में बैठे–ठाले का धंधा बनकर आया था। प्रयोक्ताओं के पास न तो काव्य–संबंधी कोई कौशल था और न किसी प्रकार की कथनीय वस्तु थी।’’ – यह कथन इनमें से किसका है?
  • A. डॉ० नन्ददुलारे वाजपेयी
  • B. डॉ० नगेन्द्र
  • C. डॉ० रामविलास शर्मा
  • D. डॉ० जगदीश गुप्त
Correct Answer: Option A - प्रयोगवाद हिन्दी में बैठे-ठाले का धंधा बनकर आया था। प्रयोक्ताओं के पास न तो काव्य–संबंधी कोई कौशल था और न किसी प्रकार की कथनीय वस्तु थी।’’–यह कथन डॉ० नन्ददुलारे वाजपेयी का है। डॉ० नगेन्द्र ने– ‘‘प्रयोगवाद को शैलीगत विद्रोह’’ कहा है। डॉ० रामविलास शर्मा ने लिखा– ‘‘प्रयोगवादी कविता में युग से उत्पन्न अनास्था, शंका, घुटन, कुण्ठा, भग्नाशा में से एक पथ के अन्वेषण की व्याकुल भावना दिखाई पड़ती है। ये कवि एक नये मार्ग का अनुसंधान करने के लिए व्याकुल हैं।’’
A. प्रयोगवाद हिन्दी में बैठे-ठाले का धंधा बनकर आया था। प्रयोक्ताओं के पास न तो काव्य–संबंधी कोई कौशल था और न किसी प्रकार की कथनीय वस्तु थी।’’–यह कथन डॉ० नन्ददुलारे वाजपेयी का है। डॉ० नगेन्द्र ने– ‘‘प्रयोगवाद को शैलीगत विद्रोह’’ कहा है। डॉ० रामविलास शर्मा ने लिखा– ‘‘प्रयोगवादी कविता में युग से उत्पन्न अनास्था, शंका, घुटन, कुण्ठा, भग्नाशा में से एक पथ के अन्वेषण की व्याकुल भावना दिखाई पड़ती है। ये कवि एक नये मार्ग का अनुसंधान करने के लिए व्याकुल हैं।’’

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प्रयोगवाद हिन्दी में बैठे-ठाले का धंधा बनकर आया था। प्रयोक्ताओं के पास न तो काव्य–संबंधी कोई कौशल था और न किसी प्रकार की कथनीय वस्तु थी।’’–यह कथन डॉ० नन्ददुलारे वाजपेयी का है। डॉ० नगेन्द्र ने– ‘‘प्रयोगवाद को शैलीगत विद्रोह’’ कहा है। डॉ० रामविलास शर्मा ने लिखा– ‘‘प्रयोगवादी कविता में युग से उत्पन्न अनास्था, शंका, घुटन, कुण्ठा, भग्नाशा में से एक पथ के अन्वेषण की व्याकुल भावना दिखाई पड़ती है। ये कवि एक नये मार्ग का अनुसंधान करने के लिए व्याकुल हैं।’’