Q: ‘प्रवर्ततां प्रकृतिहिताय पार्थिव:.....................
पुनर्ववं परिगत शक्तिरात्मभू:’
यह भरतवाक्य किस ग्रन्थ का है?
A.
मृच्छकटितम्
B.
मालविकाग्निमित्रम्
C.
अभिज्ञानशाकुन्तलम्
D.
उत्तररामचरितम्
Correct Answer:
Option C - प्रवर्तततां प्रकृतिहिताय पार्थिव:
सरस्वती श्रुतमहतां महीयताम्।
ममापि च क्षपयतु नीललोहित:
पुनर्भवं परिगतशक्तिरात्मभू:।।
यह श्लोक अभिज्ञान शाकुन्तलम् के सप्तम अंक का अन्तिम श्लोक भरत वाक्य है।
C. प्रवर्तततां प्रकृतिहिताय पार्थिव:
सरस्वती श्रुतमहतां महीयताम्।
ममापि च क्षपयतु नीललोहित:
पुनर्भवं परिगतशक्तिरात्मभू:।।
यह श्लोक अभिज्ञान शाकुन्तलम् के सप्तम अंक का अन्तिम श्लोक भरत वाक्य है।
Explanations:
प्रवर्तततां प्रकृतिहिताय पार्थिव:
सरस्वती श्रुतमहतां महीयताम्।
ममापि च क्षपयतु नीललोहित:
पुनर्भवं परिगतशक्तिरात्मभू:।।
यह श्लोक अभिज्ञान शाकुन्तलम् के सप्तम अंक का अन्तिम श्लोक भरत वाक्य है।
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