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Q: ‘परिव्राजकावसथ:’ इत्यस्य सन्धिच्छेदं कुरुत। सन्धेर्नामापि दीयताम्
  • A. परि + ब्राजका + वसथ: (दीर्घसन्धि:)
  • B. परिव्रजकौ + अवसथ: (अयादिसन्धि:)
  • C. परिव्रजकौ + अवसथ: (यण् सन्धि:)
  • D. परिव्राजक + आवसथ: (दीर्घसन्धि:)
Correct Answer: Option D - परिव्राजकावसथ: इत्यस्य सन्धिच्छेद: परिव्राजक + आवसथ: संन्धेर्नामापि दीर्घसन्धि अस्ति। अर्थात् परिव्राजकावसथ: इसका सन्धि-विच्छेद परिव्राजक + आवसथ: तथा सन्धि का नाम दीर्घसन्धि है। अक: सवर्णे दीर्घ: अर्थात् अक् (अ, इ, उ, ऋ, और ऌ) के सवर्णी वर्ण परे होने पर दीर्घ सन्धि होती है। जैसे – हिमालय: – हिम + आलय: (अ + आ = आ) गिरीश: – गिरि + ईश: (इ + ई = ई) होतृकार: – होतृ + ऋकार: (ऋ + ऋ = ऋ)
D. परिव्राजकावसथ: इत्यस्य सन्धिच्छेद: परिव्राजक + आवसथ: संन्धेर्नामापि दीर्घसन्धि अस्ति। अर्थात् परिव्राजकावसथ: इसका सन्धि-विच्छेद परिव्राजक + आवसथ: तथा सन्धि का नाम दीर्घसन्धि है। अक: सवर्णे दीर्घ: अर्थात् अक् (अ, इ, उ, ऋ, और ऌ) के सवर्णी वर्ण परे होने पर दीर्घ सन्धि होती है। जैसे – हिमालय: – हिम + आलय: (अ + आ = आ) गिरीश: – गिरि + ईश: (इ + ई = ई) होतृकार: – होतृ + ऋकार: (ऋ + ऋ = ऋ)

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परिव्राजकावसथ: इत्यस्य सन्धिच्छेद: परिव्राजक + आवसथ: संन्धेर्नामापि दीर्घसन्धि अस्ति। अर्थात् परिव्राजकावसथ: इसका सन्धि-विच्छेद परिव्राजक + आवसथ: तथा सन्धि का नाम दीर्घसन्धि है। अक: सवर्णे दीर्घ: अर्थात् अक् (अ, इ, उ, ऋ, और ऌ) के सवर्णी वर्ण परे होने पर दीर्घ सन्धि होती है। जैसे – हिमालय: – हिम + आलय: (अ + आ = आ) गिरीश: – गिरि + ईश: (इ + ई = ई) होतृकार: – होतृ + ऋकार: (ऋ + ऋ = ऋ)